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आशापुरा मां चालीसा
।। चौपाई ।।
माँ आशापुरा माताजी सुखकारी,
गुण गाये ये दुनिया सारी ॥
माँ आशापुरा माताजी की महिमा अति भारी,
माँ नाम जपे नर – नारी ॥
माँ आशापुरा माताजी के हैं आज्ञाकारी,
श्रद्धा रखते समकित धारी ॥
माँ आशापुरा माताजी प्रातः उठ जो ध्याता,
ऋद्धि सिद्धि सब संपत्ति पाता
माँ आशापुरा माताजी नाम जपे जो कोई,
उस घर में निज मंगल होई ॥
नाडोल नगरी लाखों नर आवे,
श्रद्धा से परसाद चढावे ॥
माँ आशापुरा माताजी आन पुकारे,
भक्तों के सब कष्ट निवारे ॥
माँ आशापुरा माताजी दर्शन शक्ति – शाली,
दर से कोई न जावे खाली ॥
आशापुरा माताजी जो नर नित उठ तुमको ध्यावे,
भूत पास आने नहीं पावे ॥
डाकण छूमंतर हो जावे,
दुष्ट देव आडे नहीं आवे ॥
मारवाड की दिव्य मणि हैं,
हम सब के तो आप धणी हैं ॥
कल्पतरु है परतिख माँ आशापुरा माताजी,
इच्छित देता सबको माताजी ॥
आधि व्याधि सब दोष मिटावे,
सुमिरत माँ आशापुरा माताजी शान्ति पावे ॥
बाहर परदेशे जावे नर,
नाम मंत्र माँ आशापुरा माताजी का लेकर ॥
चोघडिया दूषण मिट जावे,
काल राहु सब नाठा जावे ॥
परदेशा में नाम कमावे,
धन बोरा में भरकर लावे ॥
तन में साता मन में साता,
जो माँ आशापुरा माताजी को नित्य मनाता ॥
मोटा डूंगर रा रहवासी,
अर्ज सुणन्ता दौड्या आसी ॥
जो नर भक्ति से गुण गासी,
पावें नव रत्नों की राशि ॥
श्रद्धा से जो शीष झुकावे,
माँ आशापुरा माताजी अमृत रस बरसावे ॥
मिल जुल सब नर फेरे माला,
दौड्या आवे बादल – काला ॥
वर्षा री झडिया बरसावे,
धरती माँ री प्यास बुझावे ॥
अन्न – संपदा भर भर पावे,
चारों ओर सुकाल बनावे ॥
माँ आशापुरा माताजी है सच्चा रखवाला,
दुश्मन मित्र बनाने वाला ॥
देश – देश में माँ आशापुरा माताजी गाजे,
खूटँ – खूटँ में डंका बाजे ॥
हो नहीं अपना जिनके कोई,
माँ आशापुरा माताजी सहायक उनके होई ॥
नाभि केन्द्र से तुम्हें बुलावे,
माँ आशापुरा माताजी झट – पट दौडे आवे ॥
भूख्या नर की भूख मिटावे,
प्यासे नर को नीर पिलावे ॥
इधर उधर अब नहीं भटकना,
माँ आशापुरा माताजी के नित पाँव पकडना ॥
इच्छित संपदा आप मिलेगी,
सुख की कलियाँ नित्य खिलेंगी ॥
माँ आशापुरा माताजी गण खरतर के देवा,
सेवा से पाते नर मेवा ॥
नैन मूँद धुन रात लगावे,
सपने में वो दर्शन पावे ॥
प्रश्नों के उत्तर झट मिलते,
रस्ते के संकट सब मिटते ॥
माँ आशापुरा माताजी नित ध्यावो,
संकट मेटो मंगल पावो ॥
माँ आशापुरा माताजी जपन्ता मालम माला,
बुझ जाती दुःखों की ज्वाला ॥
नित उठे जो चालीसा गावे,
धन सुत से घर स्वर्ग बनावे ॥
माँ आशापुरा माताजी जपन्ता मालम माला,
बुझ जाती दुःखों की ज्वाला ॥
।। दोहा ।।
“माँ “आशापुरा माताजी ” चालीसा पढे
मन में श्रद्धा धार कष्ट कटे महिमा बढे,
संपदा होत अपार ॥
